Uttar Pradesh Government Hikes Sugarcane Price by ₹30 per Quintal | 46 Lakh Farmers to Benefit | UP Sugar Industry 2025 Update

TheDayspring.in | 30 Oct 2025 | 18 Views | Hindi
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्य के गन्ना किसानों को बड़ा तोहफ़ा दिया है। लंबे समय से गन्ने के मूल्य वृद्धि की मांग कर रहे किसानों के लिए यह खबर राहत लेकर आई है। सरकार ने गन्ने का राज्य सलाह मूल्य (State Advisory Price - SAP) ₹30 प्रति क्विंटल बढ़ाने की घोषणा की है। इस निर्णय के तहत सामान्य गन्ने का मूल्य अब ₹390 प्रति क्विंटल, जबकि उन्नत किस्म के गन्ने का मूल्य ₹400 प्रति क्विंटल तय किया गया है। यह फैसला सीधे तौर पर 46 लाख गन्ना किसानों को फायदा पहुँचाएगा।

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, जहाँ लाखों किसान गन्ने की खेती से अपनी जीविका चलाते हैं। चीनी मिलों और गन्ना किसानों के बीच भुगतान विवाद, देरी और लागत मूल्य को लेकर वर्षों से तनाव बना रहता है। ऐसे में यह मूल्यवृद्धि किसानों के लिए न केवल आर्थिक राहत का साधन बनेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा देगी।

राज्य सरकार का यह फैसला 2025-26 के गन्ना क्रशिंग सीजन से लागू होगा। सरकार के अनुसार, बढ़े हुए SAP से गन्ना किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी और प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक प्रवाह भी तेज़ होगा। इस फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश एक बार फिर देश का सबसे ऊँचा गन्ना मूल्य देने वाला राज्य बन गया है।

इस फैसले के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल मानी जा रही है। उन्होंने कई बैठकों में साफ कहा था कि किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में सरकार लगातार प्रयासरत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गन्ना किसान राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलना सरकार की प्राथमिकता है।

गन्ना मूल्य वृद्धि का सीधा प्रभाव राज्य के 154 से अधिक चीनी मिलों पर पड़ेगा, जो किसानों से गन्ना खरीदती हैं। हर साल उत्तर प्रदेश में करीब 1,200 लाख टन गन्ने का उत्पादन होता है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 45% हिस्सा है। इस मूल्यवृद्धि के बाद गन्ना किसानों की आमदनी बढ़ेगी, लेकिन साथ ही चीनी उद्योगों पर लागत का दबाव भी बढ़ेगा।

चीनी मिल संचालकों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से उत्पादन लागत बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, राज्य सरकार का तर्क है कि किसानों को उनका हक़ मिलना चाहिए और चीनी मिलें भी पर्याप्त मुनाफा कमा रही हैं।

पिछले कुछ वर्षों में गन्ना किसानों को भुगतान में देरी एक बड़ी समस्या रही है। कई बार किसानों को महीनों तक भुगतान का इंतज़ार करना पड़ा। इस बार सरकार ने घोषणा के साथ ही स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी मिलें समय पर भुगतान करें, अन्यथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

सरकार के अनुसार, इस बार का निर्णय केवल मूल्य वृद्धि नहीं बल्कि एक व्यापक नीति का हिस्सा है जिसमें गन्ना उत्पादन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने, जैविक खेती को प्रोत्साहन देने और किसानों को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ने पर जोर दिया गया है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला किसानों के हित में है, लेकिन इसे टिकाऊ बनाने के लिए सरकार को चीनी मिलों के बकाया भुगतान की निगरानी भी करनी होगी। उत्तर प्रदेश में गन्ना खेती लगभग 28 जिलों में की जाती है, जिनमें मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, सहारनपुर, बुलंदशहर, बरेली, लखीमपुर खीरी और हरदोई प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में किसानों की आर्थिक स्थिति गन्ना मूल्य पर काफी निर्भर करती है।

उत्तर प्रदेश में गन्ना उत्पादन न केवल किसानों की आय से जुड़ा है बल्कि यह कई उद्योगों की रीढ़ भी है — जैसे कि चीनी, इथेनॉल, गुड़, खांडसारी और पेय उद्योग। गन्ने से प्राप्त इथेनॉल उत्पादन को भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से भी प्रोत्साहित किया है। सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाया जा सके, जिससे देश का आयात बिल घटे और किसानों को नई मार्केट मिले।

राज्य सरकार के अनुसार, इस फैसले से लगभग ₹8,000 करोड़ का अतिरिक्त प्रवाह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आएगा। इससे गाँवों में खरीदारी बढ़ेगी, स्थानीय व्यापार को गति मिलेगी और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा।

कई किसान संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता ने कहा कि यह फैसला किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांगों का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि अब सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भुगतान में कोई देरी न हो और मिलों पर पारदर्शी निगरानी रखी जाए।

इस निर्णय का राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिलेगा। चूंकि उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत और विधानसभा उपचुनाव की तैयारी चल रही है, इसलिए यह फैसला ग्रामीण मतदाताओं के बीच सरकार की छवि को और मजबूत करेगा। गन्ना किसान राज्य के बड़े वोट बैंक माने जाते हैं और हर चुनाव में इनकी भूमिका निर्णायक होती है।

वित्तीय दृष्टि से देखें तो चीनी उद्योग को इस मूल्यवृद्धि का असर झेलना पड़ेगा। मिल मालिकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम घट रहे हैं और निर्यात घटा है, जिससे मुनाफा कम हुआ है। इस स्थिति में लागत बढ़ने से दबाव बढ़ेगा। हालांकि सरकार ने संकेत दिया है कि इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देकर उद्योगों को राहत दी जाएगी।

राज्य के कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष गन्ने का औसत उत्पादन 812 क्विंटल प्रति हेक्टेयर था, जबकि इस वर्ष अनुकूल मौसम के कारण उत्पादन में 3-5% की वृद्धि की उम्मीद है। इससे राज्य की चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना मिलेगा और किसानों को स्थायी आय का स्रोत भी मिलेगा।

इसके अलावा, सरकार ने यह भी कहा है कि जिन किसानों ने ड्रिप इरिगेशन, जैविक खाद और मिट्टी सुधार तकनीक अपनाई है, उन्हें अतिरिक्त बोनस देने पर विचार किया जा रहा है। यह योजना आने वाले महीने में लागू की जा सकती है।

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में गन्ना न केवल आर्थिक फसल है बल्कि सामाजिक पहचान भी रखता है। यहाँ गन्ने से जुड़ा हर मौसम किसानों के जीवन का हिस्सा बन जाता है — बुवाई से लेकर पेराई तक। जब गन्ने का मूल्य बढ़ता है, तो किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौट आती है।

गन्ने के बढ़े हुए मूल्य का असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक रूप में दिखाई देगा। वित्त वर्ष 2025-26 में कृषि क्षेत्र की विकास दर को 6.8% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से यह लक्ष्य आसानी से पूरा हो सकेगा।

सरकार के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यह मूल्य वृद्धि केवल किसानों के लिए नहीं बल्कि एक व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है — जिसमें आत्मनिर्भर भारत, ग्रामीण सशक्तिकरण और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का विकास शामिल है।

ग्रामीण अर्थशास्त्रियों का मानना है कि गन्ने की कीमत बढ़ने से छोटे किसानों की स्थिति बेहतर होगी। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में जहां किसान छोटे भूखंडों में खेती करते हैं, वहाँ यह मूल्यवृद्धि आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनेगी।

कुल मिलाकर, यह निर्णय उत्तर प्रदेश के लाखों किसानों के लिए खुशखबरी है। यह केवल ₹30 की वृद्धि नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत का सम्मान है। यह कदम राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा, ग्रामीण बाज़ार को मज़बूत करेगा और किसानों के चेहरे पर आत्मविश्वास की मुस्कान लाएगा।

आने वाले समय में यदि सरकार अपने भुगतान सिस्टम को और मजबूत करती है, तकनीकी सहायता बढ़ाती है और गन्ना आधारित उद्योगों में नवाचार को प्रोत्साहित करती है, तो उत्तर प्रदेश न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर भी गन्ना उत्पादन का केंद्र बन सकता है।
Tags: Uttar Pradesh News, Sugarcane Price Hike, Farmers News, UP Government Decision, Agriculture News, Sugar Industry 2025, Yogi Adityanath Government, Farmer Income, UP Sugarcane SAP
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