Written By: The Dayspring News (thedayspring.in) |
Date: January 09, 2026 |
Founder: Rajput Vinit Singh |
Language: Hindi
पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा राजनीतिक रणनीति और परामर्श देने वाली संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के कार्यालयों पर की गई छापेमारी ने राज्य में राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। इस कार्रवाई के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे सीधे-सीधे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार देते हुए न केवल कड़ा विरोध जताया है, बल्कि इसके खिलाफ सड़कों पर उतरने का ऐलान भी कर दिया है।
ED की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं और आगामी चुनावों को लेकर सभी दल रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। I-PAC को देश की प्रमुख राजनीतिक रणनीतिकार संस्थाओं में गिना जाता है और यह विभिन्न राजनीतिक दलों को चुनावी रणनीति, डेटा विश्लेषण और जनसंपर्क अभियानों में सलाह देती रही है। तृणमूल कांग्रेस के साथ I-PAC के पुराने और स्थापित संबंधों के कारण इस छापेमारी को केवल एक कानूनी कार्रवाई के रूप में नहीं, बल्कि राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
ED की टीम ने कोलकाता स्थित I-PAC कार्यालयों के साथ-साथ संस्था से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों के आवासों पर भी छानबीन की। आधिकारिक तौर पर एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई मनी-लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले की जांच का हिस्सा है और इसमें कानून के तहत आवश्यक कदम उठाए गए हैं। हालांकि, छापेमारी के दौरान जिन दस्तावेज़ों और डिजिटल डेटा की जांच की गई, उसे लेकर तृणमूल कांग्रेस ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया है। उनका कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को डराने और उनकी चुनावी तैयारियों को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस की रणनीति, डेटा और आंतरिक योजनाओं तक पहुंचने की कोशिश है, ताकि राजनीतिक लाभ उठाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में भाजपा को जनसमर्थन नहीं मिल रहा है, इसलिए अब केंद्रीय एजेंसियों के जरिए दबाव बनाया जा रहा है।
ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस कार्रवाई के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगी और जनता के साथ मिलकर इसका विरोध करेंगी। इसी क्रम में उन्होंने कोलकाता में एक बड़े विरोध मार्च की घोषणा की, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल होंगे। ममता बनर्जी का कहना है कि यह मार्च केवल तृणमूल कांग्रेस का नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की आवाज़ है जो लोकतंत्र और संघीय ढांचे में विश्वास रखते हैं।
छापेमारी के बाद तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं में आक्रोश साफ दिखाई दिया। पार्टी के कई नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया और कहा कि केंद्र सरकार विपक्षी शासित राज्यों में केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। तृणमूल कांग्रेस का तर्क है कि यदि वास्तव में कोई कानूनी उल्लंघन हुआ होता, तो कार्रवाई निष्पक्ष और समयबद्ध होती, न कि चुनावी माहौल के बीच अचानक।
दूसरी ओर, भाजपा और केंद्र सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। भाजपा का कहना है कि ED एक स्वतंत्र संवैधानिक एजेंसी है, जो कानून के अनुसार काम करती है और किसी भी राजनीतिक दबाव में नहीं होती। भाजपा नेताओं का तर्क है कि यदि किसी संस्था या व्यक्ति पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं, तो जांच होना स्वाभाविक है और इसे राजनीतिक रंग देना अनुचित है। केंद्र का यह भी कहना है कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा क्यों न हो।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच संबंधों को तनावपूर्ण बना दिया है। पश्चिम बंगाल में पहले भी कई बार केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाइयों को लेकर राजनीतिक टकराव देखने को मिला है। इससे पहले भी राज्य में ED और CBI की जांचों पर सत्तारूढ़ दल ने सवाल उठाए थे और उन्हें राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित बताया था। मौजूदा घटनाक्रम ने उन पुराने विवादों को फिर से ताज़ा कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि I-PAC पर की गई यह कार्रवाई केवल एक कानूनी मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह बंगाल की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। ममता बनर्जी ने जिस तरह आक्रामक रुख अपनाया है, उससे यह साफ है कि वह इसे आगामी चुनावों में एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के रूप में पेश करेंगी। उनके लिए यह मामला न केवल पार्टी की रणनीति से जुड़ा है, बल्कि उनकी उस छवि से भी, जिसमें वह खुद को बंगाल की स्वायत्तता और संघीय अधिकारों की रक्षक के रूप में प्रस्तुत करती हैं।
विरोध मार्च की घोषणा के बाद कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा इंतज़ाम किए हैं, जबकि विपक्षी दलों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। यह आशंका जताई जा रही है कि यदि प्रदर्शन बड़े पैमाने पर होता है, तो इसका असर सामान्य जनजीवन पर भी पड़ सकता है।
तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक छापेमारी की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता की है। उनका दावा है कि यदि आज एक राजनीतिक सलाहकार संस्था को निशाना बनाया जा सकता है, तो कल किसी भी नागरिक या संगठन पर इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है। इसी तर्क के आधार पर पार्टी जनता से समर्थन मांग रही है और विरोध मार्च को जनआंदोलन का रूप देने की कोशिश कर रही है।
वहीं, भाजपा समर्थकों का कहना है कि कानून का पालन सभी को करना चाहिए और यदि जांच में कुछ भी गलत नहीं पाया गया, तो तृणमूल कांग्रेस को डरने की जरूरत नहीं है। उनका यह भी कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक चश्मे से देखना सही नहीं है और इससे जनता में भ्रम फैलता है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। दिल्ली में भी तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस मुद्दे को उठाया और केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए। संसद के बाहर और भीतर इस मामले को लेकर तीखी बहस देखने को मिली, जिससे साफ है कि यह मुद्दा केवल राज्य तक सीमित नहीं रहेगा।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराएगा। ED की जांच आगे किस दिशा में जाती है और उसमें क्या निष्कर्ष निकलते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। साथ ही, ममता बनर्जी के विरोध मार्च को कितना जनसमर्थन मिलता है, यह भी तय करेगा कि यह मुद्दा राजनीतिक रूप से कितना प्रभावी साबित होता है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि I-PAC पर ED की छापेमारी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय खोल दिया है। यह अध्याय कानून, राजनीति और लोकतंत्र के बीच संतुलन को लेकर कई सवाल खड़े करता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह टकराव किस दिशा में जाता है और इसका असर राज्य तथा राष्ट्रीय राजनीति पर किस रूप में पड़ता है।
TheDayspring is a full-service digital growth agency helping businesses scale through technology, marketing, and automation. We focus on long-term value, not one-time projects.
We build scalable, secure, and conversion-focused websites and web applications designed for long-term business growth. Our development approach focuses on performance, SEO, and future scalability.
From idea validation to deployment, we develop Android and iOS applications that solve real business problems and deliver seamless user experience.
Our performance marketing strategies are built around ROI, qualified leads, and measurable growth using data-driven advertising systems.
We help brands rank, convert, and dominate search results with long-term SEO strategies focused on buyer-intent traffic.
Strong branding builds trust. We design visual identities and digital experiences that position your business as a premium brand.
We implement smart CRM and automation systems to manage leads, customers, and operations efficiently.