पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया है कि राज्य में लंबे समय से कार्यरत होम-गार्ड, हाथ-गार्ड्स और स्वयंसेवकों को उनके नियमितीकरण के संबंध में स्पष्ट नीति बनाई जाए। कोर्ट ने कहा है कि लंबे समय तक सेवा दे रहे स्वयंसेवकों को केवल ‘स्वयंसेवक’ बने रहने का अधिकार अनिश्चित काल तक नहीं दिया जा सकता। इसके लिए सरकार को छह महीनों के भीतर नियोजन और नियमितीकरण नीति तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
कोर्ट ने यह निर्णय ऐसे समय में दिया है जब कई होम-गार्ड और स्वयंसेवक वर्षों से सेवा दे रहे हैं लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि स्वयंसेवक की भूमिका महत्त्वपूर्ण है और उन्हें काम करने का अवसर देने के साथ-साथ उनके सशक्तिकरण और कानूनी सुरक्षा को भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाले स्वयंसेवकों की सेवा की अनिश्चितता उनके भविष्य और सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। इसलिए, सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक नियमितीकरण नीति तैयार की जाए, जिसमें सेवा अवधि, कार्य की प्रकृति, और पात्रता मानदंड स्पष्ट रूप से निर्धारित हों। इस नीति का उद्देश्य उन सभी स्वयंसेवकों और हाथ-गार्ड्स को न्यायसंगत अधिकार देना है जो राज्य की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
न्यायालय ने यह भी कहा कि नीति बनाने में कोई विलंब नहीं होना चाहिए और निर्धारित समयसीमा छह महीने है। इस अवधि में सरकार को न केवल नीति तैयार करनी है, बल्कि उसे लागू करने की भी व्यवस्था करनी होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि नीति में सेवा के मानक, वेतनमान, पदोन्नति के अवसर और नियमितीकरण की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से लिखी जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम होम-गार्ड्स और स्वयंसेवकों के लिए बहुत ही सकारात्मक है। लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को नियमितीकरण मिलने से उनकी कार्यप्रणाली में स्थिरता आएगी और उन्हें कानूनी सुरक्षा भी प्राप्त होगी। इससे राज्य में सुरक्षा तंत्र और आपातकालीन सेवाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
सरकार और संबंधित विभागों को अब छह माह के भीतर नीति तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत करनी होगी। इसके साथ ही राज्य के सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में पूरी तत्परता दिखाएँ।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए न्याय सुनिश्चित करता है जो वर्षों से सेवा दे रहे हैं और अब उनका भविष्य असुरक्षित था। इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि सेवा देने वालों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस आदेश से यह भी संकेत मिलता है कि राज्य सरकार अब नियमितीकरण और सेवा स्थायित्व के मुद्दों पर गंभीर है और लंबे समय से सेवा देने वाले कर्मचारियों को उचित मान्यता और कानूनी सुरक्षा प्रदान करना प्राथमिकता में है।
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